भौतिकी – दैनिक जीवन: आपकी रसोई, बस की यात्रा और मोबाइल फ़ोन में छिपा विज्ञान।
◆ शुरुआत एक सवाल से: बस अचानक रुकती है तो यात्री आगे की ओर क्यों गिरते हैं? शिमला जैसी पहाड़ी जगहों पर दाल देर से क्यों पकती है, जबकि प्रेशर कुकर में जल्दी पक जाती है? आसमान नीला क्यों है, पर डूबता सूरज लाल क्यों दिखता है? ये सब आपने हज़ारों बार देखा है। आज आप हर एक के पीछे की एक-पंक्ति वाली भौतिकी सीखेंगे — और SSC, रेलवे व राज्य परीक्षाएँ ठीक यही पूछती हैं।
◆ एक सच्ची कहानी: 28 फ़रवरी 1928 को कोलकाता में सी.वी. रमन ने पाया कि जब प्रकाश किसी द्रव से प्रकीर्णित होता है तो उसका रंग (तरंगदैर्ध्य) थोड़ा बदल जाता है। इस "रमन प्रभाव" के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला, और भारत 28 फ़रवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाता है। भौतिकी प्रयोगशाला से नहीं, साधारण चीज़ों के बारे में "क्यों?" पूछने वाले जिज्ञासु लोगों से शुरू हुई।
आज आप क्या सीखेंगे (सीखने के उद्देश्य)
SI मात्रक और रोज़मर्रा की राशियाँ मापने वाले उपकरण
गति, न्यूटन के तीन नियम, संवेग, घर्षण और गुरुत्व — दैनिक जीवन में
दाब, तैरना, पृष्ठ तनाव और केशिकत्व
कार्य, ऊर्जा और शक्ति — बिजली के बिल वाली "यूनिट" समेत
ऊष्मा, ताप के पैमाने, प्रसार और गुप्त ऊष्मा
ध्वनि — प्रतिध्वनि, पराश्रव्य, तारत्व और प्रबलता
प्रकाश — दर्पण, लेंस, अपवर्तन, प्रकीर्णन, मानव नेत्र
घर में विद्युत और चुंबकत्व — फ़्यूज़, भू-संपर्कण, वायरिंग, kWh
ऐसे आसान सूत्र जिन्हें आप 45 सेकंड में हल कर सकें
1. मापन: भौतिकी की भाषा
हर राशि के लिए एक संख्या और एक मात्रक चाहिए। पूरी दुनिया SI पद्धति (अंतर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति) का प्रयोग करती है।
सात SI मूल मात्रक:
लंबाई — मीटर (m)
द्रव्यमान — किलोग्राम (kg)
समय — सेकंड (s)
विद्युत धारा — ऐम्पियर (A)
ताप — केल्विन (K)
पदार्थ की मात्रा — मोल (mol)
ज्योति-तीव्रता — कैंडेला (cd)
मुख्य व्युत्पन्न मात्रक: बल — न्यूटन (N); कार्य/ऊर्जा — जूल (J); शक्ति — वाट (W); दाब — पास्कल (Pa); आवृत्ति — हर्ट्ज़ (Hz); आवेश — कूलॉम (C); विभवांतर — वोल्ट (V); प्रतिरोध — ओम (Ω); लेंस की क्षमता — डायोप्टर (D)।
ऐसे मात्रक जो समय जैसे लगते हैं, पर हैं नहीं:
प्रकाश वर्ष — यह दूरी का मात्रक है (प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय दूरी, लगभग 9.46 × 10^15 m)
पारसेक — यह भी दूरी (लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष)
खगोलीय इकाई (AU) — पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी, लगभग 1.5 × 10^11 m
ऐंग्स्ट्रॉम (Å) — 10^-10 m; नैनोमीटर (nm) — 10^-9 m
नॉटिकल मील — 1852 m; नॉट — चाल का मात्रक (एक नॉटिकल मील प्रति घंटा)
अश्वशक्ति (हॉर्सपावर) — शक्ति का मात्रक, लगभग 746 W
किलोवाट-घंटा (kWh) — ऊर्जा का मात्रक = 3.6 × 10^6 J (बिजली के बिल की "यूनिट")
सात मूल मात्रकों का सूत्र: "मीठा किला सजा, ऐसा केला मोटा कैंडी जैसा" → मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, मोल, कैंडेला।
🧠 सक्रिय स्मरण: प्रकाश वर्ष समय का मात्रक है या दूरी का? (दूरी का।) बिजली के बिल में एक "यूनिट" का अर्थ क्या है? (1 kWh = 3.6 × 10^6 J)
ज़रूरी उपकरण:
बैरोमीटर (वायुदाबमापी) — वायुमंडलीय दाब
हाइग्रोमीटर (आर्द्रतामापी) — आपेक्षिक आर्द्रता
हाइड्रोमीटर — द्रवों का आपेक्षिक घनत्व
लैक्टोमीटर (दुग्धमापी) — दूध की शुद्धता (घनत्व द्वारा)
एनीमोमीटर — पवन की चाल
अल्टीमीटर — ऊँचाई (विमानों में)
सीस्मोग्राफ़ (भूकंपलेखी) — भूकंपीय तरंगें
स्फिग्मोमैनोमीटर — रक्तचाप
पाइरोमीटर — बहुत ऊँचे ताप (भट्टियाँ)
ओडोमीटर — वाहन द्वारा तय दूरी; स्पीडोमीटर — उसकी चाल
ऐमीटर — धारा (श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है); वोल्टमीटर — विभवांतर (पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है)
पेरिस्कोप (परिदर्शी) — अवरोध के ऊपर से देखना (पनडुब्बी), इसमें दो समतल दर्पण होते हैं
SONAR — पानी के भीतर पराश्रव्य तरंगों का प्रयोग; RADAR — रेडियो तरंगों का प्रयोग
याद रखें: "हाइग्रो = ह्यूमिडिटी (आर्द्रता), हाइड्रो = द्रव का घनत्व, लैक्टो = दूध।"
2. गति और न्यूटन के नियम
चाल = दूरी ÷ समय (अदिश)। वेग = निश्चित दिशा में चाल (सदिश)। त्वरण = वेग में परिवर्तन ÷ समय (m/s²)।
गति के समीकरण (एकसमान त्वरण):
v = u + at
s = ut + ½at²
v² = u² + 2as
न्यूटन का पहला नियम (जड़त्व का नियम): कोई वस्तु विराम में या एकसमान गति में तब तक रहती है जब तक उस पर कोई बाहरी बल न लगे।
दैनिक जीवन: चलती बस अचानक रुके तो यात्री आगे गिरते हैं (गति का जड़त्व)। बस अचानक चले तो यात्री पीछे गिरते हैं (विराम का जड़त्व)। दरी (कालीन) को डंडे से पीटने पर धूल निकल जाती है। कार्ड को झटके से खींचने पर उस पर रखा सिक्का गिलास में गिर जाता है। भारी वस्तु का जड़त्व अधिक होता है — द्रव्यमान जड़त्व की माप है।
न्यूटन का दूसरा नियम: बल = द्रव्यमान × त्वरण (F = ma)। बल, संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है।
संवेग p = mv (kg m/s)।
दैनिक जीवन: क्रिकेट खिलाड़ी गेंद पकड़ते समय हाथ पीछे खींचता है — इससे टक्कर का समय बढ़ता है और हाथों पर बल कम लगता है। ऊँची कूद के लिए रेत का गड्ढा और कार के एयरबैग भी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।
न्यूटन का तीसरा नियम: प्रत्येक क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। ये दोनों बल अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं।
दैनिक जीवन: बंदूक का पीछे हटना (प्रतिक्षेप), रॉकेट का ऊपर जाना, तैराक का पानी को पीछे धकेलना, चलना (हम ज़मीन को पीछे धकेलते हैं), नाव से आगे कूदने पर नाव का पीछे खिसकना।
संवेग संरक्षण का नियम: बाहरी बल न हो तो कुल संवेग स्थिर रहता है। इसी कारण बंदूक पीछे हटती है: गोली का आगे का संवेग = बंदूक का पीछे का संवेग।
🧠 सक्रिय स्मरण: क्रिकेट खिलाड़ी कैच लेते समय हाथ पीछे क्यों खींचता है? (अधिक समय → कम बल।) क्या क्रिया और प्रतिक्रिया एक-दूसरे को निरस्त कर देती हैं? (नहीं — वे अलग-अलग वस्तुओं पर लगती हैं।)
तीनों नियमों का सूत्र: "ज-ब-क्रि" → जड़त्व, बल = ma, क्रिया-प्रतिक्रिया।
घर्षण: संपर्क में रखी सतहों के बीच गति का विरोध करने वाला बल।
स्थैतिक घर्षण > सर्पी (फिसलन) घर्षण > लोटनिक (रोलिंग) घर्षण। इसीलिए पहिए और बॉल बेयरिंग गति को आसान बनाते हैं।
स्नेहक (तेल, ग्रीस), बॉल बेयरिंग और धारा-रेखीय आकृति से घर्षण घटता है। टायरों और जूतों के तलवों पर खाँचे (ट्रेड) घर्षण बढ़ाते हैं। चिकने या बर्फ़ीले फ़र्श पर चलना कठिन है क्योंकि घर्षण कम होता है।
वृत्तीय गति: वृत्त में चलती वस्तु को केंद्र की ओर बल (अभिकेंद्र बल) चाहिए। मोड़ पर सड़कें ढालू (बैंकिंग) बनाई जाती हैं; साइकिल सवार मुड़ते समय अंदर की ओर झुकता है; वॉशिंग मशीन का ड्रायर और क्रीम सेपरेटर घूर्णन का प्रयोग करते हैं।
गुरुत्व केंद्र और स्थिरता: गुरुत्व केंद्र नीचा और आधार चौड़ा हो तो वस्तु अधिक स्थिर होती है। इसीलिए बस की छत पर भारी सामान नहीं लादना चाहिए और रेसिंग कारें नीची बनाई जाती हैं।
3. गुरुत्वाकर्षण
हर दो वस्तुएँ एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं — न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम। F = G m1 m2 / r², जहाँ G = 6.67 × 10^-11 N m²/kg² (सार्वत्रिक नियतांक)।
पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण g ≈ 9.8 m/s²। निर्वात में पंख और सिक्का एक साथ गिरते हैं — गिरने की दर द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती।
द्रव्यमान बनाम भार:
द्रव्यमान — पदार्थ की मात्रा, kg में, हर जगह समान।
भार — वस्तु पर गुरुत्व बल, W = mg, न्यूटन में, स्थान के साथ बदलता है।
चंद्रमा पर g, पृथ्वी के लगभग 1/6 है। 60 kg के व्यक्ति का द्रव्यमान चंद्रमा पर भी 60 kg ही रहेगा, पर भार लगभग 1/6 रह जाएगा।
ध्रुवों पर g, भूमध्य रेखा से थोड़ा अधिक है (पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी है), इसलिए ध्रुवों पर वस्तु का भार थोड़ा अधिक होता है।
ऊँचाई पर जाने पर और पृथ्वी के भीतर गहराई में जाने पर g घटता है; पृथ्वी के केंद्र पर g शून्य होता है।
पृथ्वी का पलायन वेग: लगभग 11.2 km/s।
भारहीनता: कक्षा में घूमते अंतरिक्ष यान में यात्री भारहीन महसूस करते हैं क्योंकि वे और यान साथ-साथ मुक्त रूप से गिर रहे हैं — वहाँ गुरुत्व शून्य नहीं है। मुक्त रूप से गिरती लिफ़्ट में आपका आभासी भार शून्य हो जाता है।
समुद्र में ज्वार-भाटा मुख्यतः चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से आता है।
सरल लोलक: आवर्तकाल T = 2π√(L/g)। यह गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। लंबा लोलक धीरे दोलन करता है। लोलक घड़ी को चंद्रमा पर ले जाएँ (कम g) तो वह सुस्त (धीमी) चलेगी।
🧠 सक्रिय स्मरण: क्या कक्षा में घूमते अंतरिक्ष स्टेशन में गुरुत्व शून्य है? (नहीं — वे मुक्त पतन में हैं।) वस्तु का भार कहाँ अधिक होगा — ध्रुव पर या भूमध्य रेखा पर? (ध्रुव पर।)
4. दाब, तैरना और द्रव
दाब = बल ÷ क्षेत्रफल (मात्रक पास्कल, Pa = N/m²)। समान बल कम क्षेत्रफल पर → अधिक दाब।
दैनिक जीवन: धारदार चाकू अच्छा काटता है; कील और पिन नुकीले होते हैं; स्कूल बैग की पट्टियाँ चौड़ी होती हैं; ऊँट के पैर चौड़े होते हैं; भारी ट्रकों में कई चौड़े टायर होते हैं; इमारत की नींव चौड़ी होती है।
वायुमंडलीय दाब: समुद्र तल पर लगभग 1.01 × 10^5 Pa, यानी पारे के लगभग 76 cm स्तंभ के बराबर। ऊँचाई बढ़ने पर यह घटता है।
दैनिक जीवन: स्ट्रॉ से पीना, ड्रॉपर और सक्शन हुक वायुदाब के कारण काम करते हैं। ऊँचाई पर हवाई जहाज़ में फ़ाउंटेन पेन से स्याही रिस सकती है क्योंकि बाहर का वायुदाब कम होता है। बहुत ऊँचाई पर नाक से खून आ सकता है।
क्वथनांक और दाब: अधिक दाब → अधिक क्वथनांक। प्रेशर कुकर में दाब अधिक होता है, पानी 100 °C से ऊपर उबलता है, इसलिए खाना जल्दी पकता है। पहाड़ों पर दाब कम होता है, पानी 100 °C से नीचे उबल जाता है, इसलिए खाना पकने में अधिक समय लगता है।
पास्कल का नियम: बंद द्रव पर लगाया गया दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित होता है। हाइड्रोलिक लिफ़्ट, हाइड्रोलिक ब्रेक और हाइड्रोलिक प्रेस इसी पर काम करते हैं।
आर्किमिडीज़ का सिद्धांत: द्रव में डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल (उत्प्लावन बल) लगता है, जो वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है।
यदि वस्तु का घनत्व द्रव से कम हो तो वह तैरती है। लोहे की कील डूब जाती है पर लोहे का जहाज़ तैरता है — जहाज़ का खोखला आकार बहुत अधिक पानी हटाता है।
नदी के पानी की तुलना में समुद्री पानी में तैरना आसान है क्योंकि समुद्री पानी अधिक घना होता है।
बर्फ़ पानी पर तैरती है क्योंकि बर्फ़ का घनत्व (लगभग 0.92 g/cm³) पानी से कम है।
पृष्ठ तनाव: द्रव की सतह एक खिंची हुई झिल्ली की तरह व्यवहार करती है। वर्षा की बूँदें और पारे की बूँदें गोल होती हैं; कीड़े पानी पर चल लेते हैं; साबुन और डिटर्जेंट पृष्ठ तनाव घटाते हैं, इसलिए कपड़ों को अच्छी तरह भिगोते हैं।
केशिकत्व: पतली नली में द्रव ऊपर चढ़ता है। दीये की बत्ती में तेल चढ़ना, स्याही-सोख (ब्लॉटिंग पेपर) और तौलिए का पानी सोखना केशिका क्रिया से होता है।
बर्नूली का सिद्धांत (जहाँ तरल तेज़ बहता है, वहाँ दाब कम होता है): हवाई जहाज़ के पंख को उठाव (लिफ़्ट) मिलता है; आँधी में छतें उड़ सकती हैं; स्प्रेयर (कणित्र) काम करता है।
🧠 सक्रिय स्मरण: प्रेशर कुकर में खाना जल्दी क्यों पकता है? (अधिक दाब → अधिक क्वथनांक।) हाइड्रोलिक लिफ़्ट किस नियम पर चलती है? (पास्कल का नियम।)
5. कार्य, ऊर्जा और शक्ति
कार्य W = बल × विस्थापन (बल की दिशा में)। मात्रक जूल (J)। यदि विस्थापन न हो तो कार्य शून्य — भारी बक्सा पकड़कर खड़ा व्यक्ति भौतिकी के अनुसार कोई कार्य नहीं कर रहा।
गतिज ऊर्जा (गति के कारण) KE = ½mv²। चाल दोगुनी हो तो गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है।
स्थितिज ऊर्जा (स्थिति के कारण) PE = mgh। बाँध में रुका पानी, खिंचा हुआ धनुष, कसी हुई स्प्रिंग।
ऊर्जा संरक्षण का नियम: ऊर्जा न तो बनाई जा सकती है, न नष्ट की जा सकती है; केवल उसका रूप बदलता है।
शक्ति = कार्य ÷ समय। मात्रक वाट (W)। 1 अश्वशक्ति ≈ 746 W।
रोज़ के ऊर्जा रूपांतरण:
विद्युत बल्ब — विद्युत → प्रकाश (और ऊष्मा)
विद्युत मोटर/पंखा — विद्युत → यांत्रिक
जनित्र (जनरेटर)/डायनेमो — यांत्रिक → विद्युत
बैटरी/सेल — रासायनिक → विद्युत
सौर सेल — प्रकाश → विद्युत
माइक्रोफ़ोन — ध्वनि → विद्युत; लाउडस्पीकर — विद्युत → ध्वनि
याद रखें: "मोटर मोड़े (घुमाए), जनरेटर जनमे (बिजली)" — मोटर बिजली से गति देती है, जनरेटर गति से बिजली पैदा करता है।
6. ऊष्मा और ताप
ऊष्मा ऊर्जा है; ताप बताता है कि वस्तु कितनी गर्म या ठंडी है।
ताप के पैमाने:
°F = (9/5) × °C + 32
K = °C + 273 (अधिक सटीक 273.15)
पानी 0 °C = 32 °F = 273 K पर जमता है, 100 °C = 212 °F = 373 K पर उबलता है (सामान्य दाब पर)।
सामान्य मानव शरीर का ताप: 37 °C = 98.6 °F।
−40° सेल्सियस और फ़ारेनहाइट दोनों पैमानों पर समान होता है।
परम शून्य: 0 K = −273.15 °C।
डॉक्टरी (क्लिनिकल) थर्मामीटर लगभग 35 °C से 42 °C तक पढ़ता है; इसमें एक मोड़ (किंक) होता है ताकि पारा अपने-आप नीचे न गिरे।
ऊष्मीय प्रसार: अधिकतर वस्तुएँ गर्म करने पर फैलती हैं। रेल की पटरियों के बीच जगह छोड़ी जाती है; गर्मियों में बिजली के तार झूल जाते हैं; कसा हुआ धातु का ढक्कन गर्म पानी में रखने पर खुल जाता है।
जल का असंगत प्रसार: 0 °C से 4 °C तक गर्म करने पर पानी सिकुड़ता है। पानी का घनत्व 4 °C पर अधिकतम होता है। इसीलिए झीलें ऊपर से जमती हैं और बर्फ़ के नीचे पानी में मछलियाँ जीवित रहती हैं।
विशिष्ट ऊष्मा: पानी की विशिष्ट ऊष्मा बहुत अधिक है (लगभग 4200 J/kg K)। यह धीरे गर्म और धीरे ठंडा होता है। दिन में समुद्र, ज़मीन से ठंडा रहता है → दिन में समुद्री समीर; रात में ज़मीन जल्दी ठंडी होती है → रात में स्थलीय समीर। तटीय क्षेत्रों की जलवायु सम रहती है।
गुप्त ऊष्मा: अवस्था-परिवर्तन के समय ताप बदले बिना ली या दी गई ऊष्मा।
0 °C की बर्फ़, 0 °C के पानी से अधिक ठंडक देती है — बर्फ़ गलन की गुप्त ऊष्मा (लगभग 3.34 × 10^5 J/kg) भी सोखती है।
100 °C की भाप से जलना, 100 °C के उबलते पानी से जलने से अधिक गंभीर होता है — भाप वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (लगभग 22.5 × 10^5 J/kg) अतिरिक्त देती है।
वाष्पन से ठंडक: मटके (घड़े) का पानी ठंडा रहता है; पसीना सूखने पर ठंडक लगती है; कुत्ते हाँफते हैं; पंखा पसीने के वाष्पन को तेज़ करके ठंडक देता है। रेफ़्रिजरेटर अपनी नलियों में प्रशीतक (रेफ़्रिजरेंट) के वाष्पन से ठंडा करता है।
ऊष्मा का संचरण:
चालन — ठोसों में (गर्म चाय में रखा धातु का चम्मच गर्म हो जाता है)
संवहन — तरलों में कणों की गति से (समुद्री समीर, पानी का उबलना, कमरे का गर्म होना)
विकिरण — माध्यम की ज़रूरत नहीं (सूर्य की ऊष्मा का पृथ्वी तक पहुँचना)
थर्मस फ़्लास्क तीनों को घटाता है: निर्वात चालन और संवहन रोकता है, चमकीली (रजतित) दीवारें विकिरण घटाती हैं।
गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े आरामदायक होते हैं (वे ऊष्मा परावर्तित करते हैं); गहरे रंग के कपड़े अधिक ऊष्मा सोखते हैं। ऊनी कपड़े हमें गर्म रखते हैं क्योंकि उनमें हवा फँसी रहती है, जो ऊष्मा की कुचालक है।
🧠 सक्रिय स्मरण: भाप से जलना उबलते पानी से अधिक कष्टदायक क्यों है? (वाष्पन की गुप्त ऊष्मा।) पानी किस ताप पर सबसे घना होता है? (4 °C)
याद रखें: "4 डिग्री — मछली की ज़िंदगी" → 4 °C पर अधिकतम घनत्व बर्फ़ के नीचे मछलियों को बचाता है।
7. ध्वनि
ध्वनि कंपन से उत्पन्न यांत्रिक तरंग है। इसे माध्यम चाहिए — यह निर्वात में नहीं चल सकती (चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री रेडियो से बात करते हैं)।
ध्वनि की चाल: ठोस में सबसे तेज़, फिर द्रव, गैस में सबसे धीमी। लगभग मान (NCERT, 25 °C): वायु 346 m/s, पानी लगभग 1500 m/s, स्टील लगभग 5960 m/s। ताप बढ़ने पर वायु में ध्वनि की चाल बढ़ती है।
प्रकाश, ध्वनि से बहुत तेज़ है, इसलिए बिजली की चमक पहले दिखती है, गड़गड़ाहट बाद में सुनाई देती है।
तरंग समीकरण: चाल = आवृत्ति × तरंगदैर्ध्य (v = fλ)।
आवृत्ति परिसर:
अवश्रव्य (इन्फ़्रासोनिक) — 20 Hz से कम (भूकंप, व्हेल, गैंडा, हाथी)
श्रव्य परिसर — मनुष्य के लिए 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz)
पराश्रव्य (अल्ट्रासोनिक) — 20 kHz से अधिक (चमगादड़, डॉल्फ़िन; SONAR, अल्ट्रासोनोग्राफ़ी, सफ़ाई और धातु में दरार खोजने में प्रयोग)
ध्वनि के लक्षण:
तारत्व (पिच) — आवृत्ति पर निर्भर (स्त्री या बच्चे की आवाज़ प्रायः अधिक तारत्व वाली होती है)
प्रबलता — आयाम पर निर्भर; डेसिबल (dB) में मापी जाती है
गुणता (टिम्बर) — समान तारत्व और प्रबलता पर भी आवाज़ या वाद्य को पहचानने में मदद करती है
प्रतिध्वनि: परावर्तित ध्वनि का अलग से सुनाई देना। ध्वनि का प्रभाव हमारे मस्तिष्क में लगभग 0.1 s तक रहता है, इसलिए परावर्तक सतह कम से कम लगभग 17.2 m दूर होनी चाहिए (344 m/s पर)। अवरोध की दूरी = (चाल × समय) ÷ 2।
चमगादड़ पराश्रव्य तरंगों की प्रतिध्वनि से रास्ता खोजते हैं (इकोलोकेशन)।
डॉप्लर प्रभाव: पास आती एम्बुलेंस का सायरन ऊँचे तारत्व का और दूर जाती एम्बुलेंस का सायरन नीचे तारत्व का सुनाई देता है।
पराध्वनिक (सुपरसोनिक): ध्वनि से तेज़ (मैक संख्या 1 से अधिक)। सुपरसोनिक विमान ध्वनि बूम (सोनिक बूम) पैदा करते हैं।
🧠 सक्रिय स्मरण: क्या चंद्रमा की सतह पर ध्वनि चल सकती है? (नहीं — वहाँ वायु नहीं।) कौन-सा जीव अँधेरे में उड़ने के लिए पराश्रव्य का प्रयोग करता है? (चमगादड़)
याद रखें: "ठोस दौड़े, द्रव चले, गैस रेंगे" → ध्वनि की चाल ठोस > द्रव > गैस।
8. प्रकाश
निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 10^8 m/s (सबसे तेज़)। सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक लगभग 8 मिनट 20 सेकंड (लगभग 500 s) में पहुँचता है।
परावर्तन:
समतल दर्पण — प्रतिबिंब आभासी, सीधा, वस्तु के बराबर, दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर जितनी वस्तु आगे है, और पार्श्व-उल्टा (इसीलिए एम्बुलेंस के आगे "AMBULANCE" उल्टे अक्षरों में लिखा होता है)।
अपना पूरा प्रतिबिंब देखने के लिए समतल दर्पण की लंबाई कम से कम आपकी ऊँचाई की आधी होनी चाहिए।
θ कोण पर रखे दो समतल दर्पण (360/θ − 1) प्रतिबिंब बनाते हैं जब 360/θ सम हो: 90° पर → 3, 60° पर → 5 प्रतिबिंब। समांतर दर्पण → अनंत प्रतिबिंब। बहुरूपदर्शी (कैलिडोस्कोप) में झुके हुए दर्पण, पेरिस्कोप में दो समतल दर्पण होते हैं।
अवतल दर्पण (अभिसारी) — दाढ़ी बनाने/मेकअप का दर्पण, दंत चिकित्सक का दर्पण, टॉर्च और कार की हेडलाइट के परावर्तक, सौर भट्टी।
उत्तल दर्पण (अपसारी) — वाहनों में पीछे देखने का दर्पण (हमेशा सीधा, छोटा प्रतिबिंब और अधिक बड़ा दृष्टि-क्षेत्र), सड़क के तीखे मोड़ों पर लगे दर्पण।
अपवर्तन (एक माध्यम से दूसरे में जाने पर प्रकाश का मुड़ना):
पानी में पेंसिल मुड़ी दिखती है; तालाब अपनी वास्तविक गहराई से उथला दिखता है; पानी भरे गिलास में नींबू बड़ा दिखता है।
अपवर्तनांक n = निर्वात में प्रकाश की चाल ÷ माध्यम में चाल। पानी ≈ 1.33, काँच ≈ 1.5, हीरा ≈ 2.42।
आभासी गहराई = वास्तविक गहराई ÷ n।
वायुमंडलीय अपवर्तन: तारे टिमटिमाते हैं (ग्रह प्रायः नहीं, क्योंकि वे पास हैं और विस्तृत स्रोत जैसे दिखते हैं)। सूर्य वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले और वास्तविक सूर्यास्त के लगभग 2 मिनट बाद तक दिखता है।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन: जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण से अधिक कोण पर जाता है, तो वह पूरी तरह परावर्तित हो जाता है। उदाहरण: हीरे का चमकना, प्रकाशीय तंतु (ऑप्टिकल फ़ाइबर — इंटरनेट केबल और एंडोस्कोपी), रेगिस्तान व गर्म सड़क पर मृगतृष्णा।
विक्षेपण: प्रिज़्म से श्वेत प्रकाश सात रंगों में बँट जाता है — बैंजनीआनाहपीनाला (VIBGYOR: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल)। लाल सबसे कम, बैंगनी सबसे अधिक मुड़ता है। इंद्रधनुष वर्षा की बूँदों में सूर्य के प्रकाश के विक्षेपण, अपवर्तन और आंतरिक परावर्तन से बनता है; यह सूर्य की विपरीत दिशा में दिखता है।
प्रकाश का प्रकीर्णन:
आकाश नीला दिखता है क्योंकि वायु के अणु नीले प्रकाश (कम तरंगदैर्ध्य) को लाल की तुलना में बहुत अधिक प्रकीर्णित करते हैं।
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखता है क्योंकि प्रकाश को वायु में लंबा रास्ता तय करना पड़ता है और अधिकांश नीला प्रकाश बिखर जाता है।
ख़तरे के संकेत लाल रंग के होते हैं क्योंकि लाल प्रकाश सबसे कम प्रकीर्णित होता है और दूर से दिख जाता है।
बहुत ऊँचाई पर अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला दिखता है — वहाँ प्रकाश बिखेरने के लिए वायु नहीं है।
बादल सफ़ेद दिखते हैं क्योंकि पानी की बड़ी बूँदें सभी रंगों को लगभग समान रूप से प्रकीर्णित करती हैं।
धूल भरे कमरे या जंगल में प्रकाश-किरण का रास्ता दिखना टिंडल प्रभाव है।
लेंस:
उत्तल लेंस (अभिसारी) — आवर्धक लेंस, कैमरा, आँख का लेंस, दूर-दृष्टि दोष का चश्मा।
अवतल लेंस (अपसारी) — निकट-दृष्टि दोष का चश्मा।
लेंस की क्षमता P = 1/f (f मीटर में), मात्रक डायोप्टर (D)। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक, अवतल की ऋणात्मक।
मानव नेत्र:
आँख का लेंस उत्तल है; रेटिना पर बना प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा होता है; मस्तिष्क उसे सीधा समझता है।
सामान्य आँख का निकट बिंदु 25 cm और दूर बिंदु अनंत है।
दृष्टि-निर्बंध (persistence of vision): रेटिना पर प्रतिबिंब लगभग 1/16 सेकंड तक बना रहता है — इसी से सिनेमा लगातार चलता दिखता है।
निकट-दृष्टि दोष / मायोपिया (दूर की वस्तु नहीं दिखती) — अवतल लेंस से सुधार।
दूर-दृष्टि दोष / हाइपरमेट्रोपिया (पास की वस्तु नहीं दिखती) — उत्तल लेंस से सुधार।
जरा-दूरदर्शिता / प्रेसबायोपिया (बुढ़ापा) — द्विफ़ोकसी (बाइफ़ोकल) लेंस। अबिंदुकता (एस्टिग्मैटिज़्म) — बेलनाकार लेंस। मोतियाबिंद — आँख का लेंस धुंधला, शल्य चिकित्सा से उपचार।
विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम (घटती तरंगदैर्ध्य): रेडियो तरंगें → सूक्ष्म तरंगें (माइक्रोवेव) → अवरक्त → दृश्य → पराबैंगनी → X-किरणें → गामा किरणें।
उपयोग: रेडियो/टीवी और RADAR (रेडियो तरंगें व माइक्रोवेव), माइक्रोवेव ओवन, टीवी रिमोट और रात्रि-दृष्टि (अवरक्त), कीटाणुनाशन (पराबैंगनी), हड्डियों का चित्र (X-किरणें), कैंसर उपचार (गामा किरणें)। ओज़ोन परत हानिकारक पराबैंगनी किरणों का अधिकांश भाग सोख लेती है।
स्मृति-सूत्र:
"निकट-दृष्टि → अवतल" (दोनों में 'अ' की ध्वनि: मायोपिया, अवतल) — दूर-दृष्टि → उत्तल।
स्पेक्ट्रम क्रम: "राजू माइक इधर दे, उधर X-ray गया" → रेडियो, माइक्रो, इन्फ़्रारेड (अवरक्त), दृश्य, UV (पराबैंगनी), X-ray, गामा।
🧠 सक्रिय स्मरण: ख़तरे की बत्ती लाल क्यों होती है? (सबसे कम प्रकीर्णन।) पीछे देखने के लिए कौन-सा दर्पण? (उत्तल।) मायोपिया किस लेंस से सुधरता है? (अवतल।)
9. घर में विद्युत और चुंबकत्व
धारा I = आवेश ÷ समय (ऐम्पियर)। ओम का नियम: V = IR (स्थिर ताप पर)। प्रतिरोध का मात्रक: ओम (Ω)।
तार का प्रतिरोध लंबाई के साथ बढ़ता है और मोटाई (अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल) बढ़ने पर घटता है।
श्रेणीक्रम: R = R1 + R2 + … (धारा समान)। पार्श्वक्रम: 1/R = 1/R1 + 1/R2 + … (विभवांतर समान)।
घरेलू उपकरण पार्श्वक्रम में जोड़े जाते हैं, ताकि हर एक को पूरा विभवांतर मिले और उसे अलग से चालू/बंद किया जा सके।
विद्युत शक्ति P = VI = I²R = V²/R। ऊर्जा = शक्ति × समय। 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10^6 J।
उदाहरण: 100 W का बल्ब 10 घंटे जले तो 100 × 10 = 1000 Wh = 1 kWh = 1 यूनिट ऊर्जा ख़र्च होती है।
विद्युत धारा का तापीय प्रभाव:
इस्त्री, हीटर, टोस्टर — तापन तत्व नाइक्रोम का (उच्च प्रतिरोधकता वाली मिश्रधातु, जो आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होती)।
तंतु बल्ब — टंगस्टन का तंतु (बहुत ऊँचा गलनांक); तंतु की आयु बढ़ाने के लिए बल्ब में नाइट्रोजन या आर्गन जैसी अक्रिय गैसें भरी जाती हैं।
फ़्यूज़ — कम गलनांक का तार, जो विद्युन्मय (लाइव) तार के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ता है; अधिक धारा बहने पर (अतिभार या लघुपथन/शॉर्ट सर्किट) पिघलकर परिपथ तोड़ देता है। MCB (लघु परिपथ विच्छेदक) यही काम करता है और दोबारा चालू किया जा सकता है।
भारत में घरेलू वायरिंग (NCERT): विद्युन्मय (लाइव) तार — लाल आवरण; उदासीन (न्यूट्रल) — काला; भू-संपर्क (अर्थ) — हरा। लाइव और न्यूट्रल के बीच विभवांतर 220 V; AC की आवृत्ति 50 Hz। धातु के आवरण वाले उपकरणों से झटके से भू-संपर्कण (अर्थिंग) बचाता है।
उच्च वोल्टता के एक ही तार पर बैठी चिड़िया सुरक्षित रहती है क्योंकि उसके शरीर के आर-पार कोई विभवांतर नहीं होता; दो तारों को एक साथ छूने पर परिपथ पूरा हो जाएगा।
चुंबकीय प्रभाव:
ओर्स्टेड ने दिखाया कि धारावाही तार कंपास की सुई को विक्षेपित करता है — विद्युत से चुंबकत्व।
विद्युत चुंबक — क्रेन, बिजली की घंटी, MRI मशीन में।
फ़ैराडे ने विद्युत चुंबकीय प्रेरण खोजा — बदलता चुंबकीय क्षेत्र धारा पैदा करता है। जनित्र इसी पर काम करते हैं। ट्रांसफ़ॉर्मर AC का वोल्टेज बदलता है; यह DC पर काम नहीं करता।
विद्युत मोटर: विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा। जनित्र: यांत्रिक → विद्युत।
पृथ्वी एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है; स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकता है। पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर के पास चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव है, इसलिए कंपास की सुई का उत्तरी ध्रुव उधर खिंचता है।
🧠 सक्रिय स्मरण: घरेलू उपकरण पार्श्वक्रम में क्यों? (हर एक को पूरा वोल्टेज, अलग स्विच।) फ़्यूज़ किस तार में जुड़ता है? (लाइव तार में, श्रेणीक्रम में।)
तारों के रंग का सूत्र: "लाल लाइव, काला कम-बैक, हरा धरती" → लाइव लाल, न्यूट्रल काला (वापसी), अर्थ हरा।
⚠️ सावधान: परीक्षक का जाल
जाल 1 — "प्रकाश वर्ष समय का मात्रक है।" जाल का प्रकार: समान नाम। "वर्ष" शब्द भ्रमित करता है। प्रकाश वर्ष दूरी का मात्रक है।
जाल 2 — "अंतरिक्ष यात्री इसलिए तैरते हैं क्योंकि अंतरिक्ष में गुरुत्व नहीं होता।" जाल का प्रकार: लगभग सही कथन। कक्षा में गुरुत्व मौजूद है; यात्री भारहीन इसलिए लगते हैं क्योंकि वे यान के साथ मुक्त पतन में हैं।
जाल 3 — "उत्तल लेंस निकट-दृष्टि दोष सुधारता है।" जाल का प्रकार: लगभग सही कथन (लेंस बदल दिया गया)। निकट-दृष्टि → अवतल; दूर-दृष्टि → उत्तल।
जाल 4 — "फ़्यूज़ पार्श्वक्रम में / न्यूट्रल तार में जुड़ता है।" जाल का प्रकार: लगभग सही कथन। फ़्यूज़ लाइव तार में श्रेणीक्रम में जुड़ता है।
जाल 5 — "आकाश नीला है क्योंकि समुद्र नीला प्रकाश परावर्तित करता है।" जाल का प्रकार: विपरीत कार्य-कारण। आकाश वायु के अणुओं द्वारा नीले प्रकाश के प्रकीर्णन से नीला है; समुद्र आंशिक रूप से आकाश को परावर्तित करने से नीला दिखता है।
🔁 भाषाई कंट्रास्ट: हिंदी में ऐसा, अंग्रेज़ी में वैसा
जड़त्व — Inertia
संवेग — Momentum
घर्षण — Friction
गुरुत्वाकर्षण — Gravitation
उत्प्लावन बल — Buoyant force
पृष्ठ तनाव — Surface tension
केशिकत्व — Capillarity
विशिष्ट ऊष्मा — Specific heat
गुप्त ऊष्मा — Latent heat
प्रतिध्वनि — Echo
पराश्रव्य — Ultrasound
अपवर्तन — Refraction
पूर्ण आंतरिक परावर्तन — Total internal reflection
प्रकीर्णन — Scattering
निकट-दृष्टि दोष — Myopia
दूर-दृष्टि दोष — Hypermetropia
विद्युत चुंबकीय प्रेरण — Electromagnetic induction
भू-संपर्क तार — Earth wire
🔗 स्थैतिक–गतिशील संबंध (Static–Dynamic Link)
चंद्रयान-3 (ISRO) 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरा (सॉफ़्ट लैंडिंग); उतरने के स्थान को "शिव शक्ति पॉइंट" नाम दिया गया और भारत में 23 अगस्त अब राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। चंद्रमा पर सॉफ़्ट लैंडिंग इसी अध्याय की भौतिकी का सीधा उपयोग है: चंद्रमा का गुरुत्व पृथ्वी का लगभग 1/6 है, वहाँ वायु नहीं, इसलिए न वायु-प्रतिरोध और न ध्वनि — लैंडर को अपने इंजनों से गति धीमी करनी पड़ी (न्यूटन का तीसरा नियम)।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फ़रवरी) सी.वी. रमन द्वारा रमन प्रभाव (1928) की खोज की याद में है — यह प्रकाश के प्रकीर्णन से जुड़ा है, वही विषय जो नीले आकाश को समझाता है।
📊 हाई-यील्ड तथ्य और आँकड़े (स्थैतिक)
राशि | मान
निर्वात में प्रकाश की चाल | 3 × 10^8 m/s
सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में समय | लगभग 8 मिनट 20 सेकंड (लगभग 500 s)
वायु में ध्वनि की चाल (25 °C) | लगभग 346 m/s
मनुष्य का श्रव्य परिसर | 20 Hz – 20 kHz
प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी | लगभग 17.2 m
पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण | 9.8 m/s²
पृथ्वी का पलायन वेग | लगभग 11.2 km/s
समुद्र तल पर वायुमंडलीय दाब | लगभग 1.01 × 10^5 Pa (पारे का 76 cm)
सामान्य शरीर ताप | 37 °C = 98.6 °F
पानी का अधिकतम घनत्व | 4 °C पर
सामान्य आँख का निकट बिंदु | 25 cm
1 kWh (बिजली की एक यूनिट) | 3.6 × 10^6 J
1 अश्वशक्ति | लगभग 746 W
भारत में घरेलू आपूर्ति (NCERT) | 220 V AC, 50 Hz
📋 सारांश तालिका
विषय | मुख्य विचार | दैनिक जीवन का उदाहरण
जड़त्व | वस्तु अपनी अवस्था बदलने का विरोध करती है | बस के ब्रेक लगने पर यात्री आगे गिरता है
संवेग व आवेग | टक्कर का अधिक समय → कम बल | क्रिकेट खिलाड़ी हाथ पीछे खींचता है
क्रिया-प्रतिक्रिया | बराबर और विपरीत, अलग वस्तुओं पर | रॉकेट, बंदूक का प्रतिक्षेप
दाब | P = F/A | धारदार चाकू, बैग की चौड़ी पट्टी
क्वथनांक | दाब के साथ बढ़ता है | प्रेशर कुकर; पहाड़ों पर धीमा पकना
तैरना | घनत्व द्रव से कम | पानी पर बर्फ़, लोहे का जहाज़
गुप्त ऊष्मा | ताप बदले बिना ली गई ऊष्मा | भाप से अधिक जलन
पानी की विशिष्ट ऊष्मा | उच्च | समुद्री और स्थलीय समीर
प्रतिध्वनि | कम से कम लगभग 17.2 m | बड़े ख़ाली हॉल में गूँज
प्रकीर्णन | नीला सबसे अधिक, लाल सबसे कम | नीला आकाश, लाल ख़तरे के संकेत
पूर्ण आंतरिक परावर्तन | सघन से विरल, कोण > क्रांतिक | हीरा, ऑप्टिकल फ़ाइबर, मृगतृष्णा
नेत्र दोष | निकट-दृष्टि–अवतल, दूर-दृष्टि–उत्तल | चश्मा
फ़्यूज़ | कम गलनांक, लाइव तार में श्रेणीक्रम | अतिभार से सुरक्षा
📅 रिवीजन प्लानर
इसे 2 दिन बाद दोहराएँ: किताब बंद करके सात SI मूल मात्रक, न्यूटन के तीनों नियम (हर एक का एक उदाहरण) और सूत्र P = F/A, KE = ½mv², P = VI लिखें।
साप्ताहिक दोहराव: प्रकाश और ध्वनि पर 10 मिनट का ब्लर्टिंग सत्र करें — दर्पण, लेंस, नेत्र दोष, प्रकीर्णन, प्रतिध्वनि, आवृत्ति परिसर। फिर एक अभ्यास सेट हल करें।
मासिक ब्लर्टिंग: पूरे अध्याय से जो कुछ याद है, एक पन्ने पर लिखें, सारांश तालिका से मिलाएँ और छूटे हिस्सों को लाल रंग से चिह्नित करें। केवल लाल हिस्से दोबारा पढ़ें।